एशिया प्रशांत आर्थिक सहयोग मंच (एपेक) सप्ताह दक्षिण अमेरिकी देश पेरू की राजधानी लीमा में शुरु हो गया. 14 नवंबर 2016 से शुरु हुआ सप्ताह 20 नवंबर 2016 तक चलेगा. फोरम में प्रशांत क्षेत्र में स्थित 21 रिम देश ( ऐसे देश जो प्रशांत महासागर के तट पर बसे हैं) के व्यापारी, निवेशक और आर्थिक नेता भाग लेंगे.
शिखर सम्मेलन का मुख्य एजेंडा:
अंतरराष्ट्रीय व्यापार नीतियों, गुणवत्तापूर्ण विकास एवं इन देशों में रहने वाले लोगों की आजीविका स्थितियों में सुधार के भविष्य पर चर्चा करना.
सम्मेलन में प्राथमिकता वाले निम्नलिखित विषयों पर चर्चा की जाएगीः
• मानव पूंजी विकास को बढ़ावा देना
• छोटे और मझोले– आकार वाले उद्यमों (एसएमई) को अपग्रेड करना
• क्षेत्रीय खाद्य बाजार को बढ़ाना
• क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण को आगे बढ़ाना
• छोटे और मझोले– आकार वाले उद्यमों (एसएमई) को अपग्रेड करना
• क्षेत्रीय खाद्य बाजार को बढ़ाना
• क्षेत्रीय आर्थिक एकीकरण को आगे बढ़ाना
एपेक के बारे में:
• एशिया– प्रशांत अर्थव्यवस्थाओं में बढ़ती निर्भरता का समर्थन करने के लिए 1989 में इसे बनाया गया था.
• अन्य इलाकों में क्षेत्रीय व्यापार ब्लॉक के बनाए जाने ने भी इसकी स्थापना में योगदान किया.
• यह एशिया– प्रशांत क्षेत्र में मुक्त व्यापार को बढ़ावा देना और सदस्य अर्थव्यवस्थाओं के बीच समृद्धि लाना चाहता है.
• इसके कुछ सदस्य देश हैं– ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान, चीन, वियतनाम, कनाडा, मैक्सिको, रुस, इंडोनेशिया और न्यूजीलैंड.
• वार्षिक एपेक शिखर सम्मेलन में एपेक के सभी सदस्य देशों की सरकार के प्रमुख हिस्सा लेते हैं.
• एपेक क्षेत्र विश्व के जीडीपी में 57% और वैश्विक व्यापार में 49% की हिस्सेदारी रखता है.
• अन्य इलाकों में क्षेत्रीय व्यापार ब्लॉक के बनाए जाने ने भी इसकी स्थापना में योगदान किया.
• यह एशिया– प्रशांत क्षेत्र में मुक्त व्यापार को बढ़ावा देना और सदस्य अर्थव्यवस्थाओं के बीच समृद्धि लाना चाहता है.
• इसके कुछ सदस्य देश हैं– ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान, चीन, वियतनाम, कनाडा, मैक्सिको, रुस, इंडोनेशिया और न्यूजीलैंड.
• वार्षिक एपेक शिखर सम्मेलन में एपेक के सभी सदस्य देशों की सरकार के प्रमुख हिस्सा लेते हैं.
• एपेक क्षेत्र विश्व के जीडीपी में 57% और वैश्विक व्यापार में 49% की हिस्सेदारी रखता है.
भारत एपेक का सदस्य नहीं है. हालांकि भारत ने इसमें शामिल किए जाने की अपील की है और संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और पापुआ न्यू गिनी जैसे देशों से इसे समर्थन भी मिला, लेकिन आखिरकार इसे शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई. इसकी मुख्य वजह है यह प्रशांत महासागर के तटीय देशों में नहीं आता. हालांकि, नवंबर 2011 में पहली बार इसे पर्यवेक्षक देश के तौर पर आमंत्रित किया गया था.
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